सोचो अगर एक साल पहले कोई बोलता कि उत्तराखंड में कैबिनेट के पांच पद खाली पड़े रहेंगे — तो शायद यकीन न होता। लेकिन यही हुआ। और अब जब चुनाव की दस्तक सुनाई देने लगी है, तब जाकर CM पुष्कर सिंह धामी ने वो काम किया जिसका इंतजार पूरे प्रदेश को था। नवरात्र के दूसरे दिन राजभवन में जो हुआ, उसने उत्तराखंड की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया।
पांच विधायक — पांच नए मंत्री। और अब धामी सरकार का मंत्रिमंडल पहली बार पूरी तरह भर गया है।
क्या हुआ 20 मार्च को देहरादून में
20 मार्च 2026 को देहरादून के राजभवन में एक शपथ ग्रहण समारोह हुआ जो बेहद खास रहा। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने पांच विधायकों को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई। शपथ लेने वाले पांच चेहरे थे:
1. खजान दास — सबसे पहले शपथ ली, पार्टी में लंबा अनुभव रखते हैं। 2. भारत सिंह चौधरी — इन्होंने संस्कृत में शपथ ली, जिसने सबका ध्यान खींचा। 3. मदन कौशिक — BJP के जाने-माने चेहरे, हरिद्वार से मजबूत पकड़। 4. प्रदीप बत्रा — संगठन में active रहे हैं। 5. राम सिंह केड़ा — पहाड़ी क्षेत्र की नुमाइंदगी करते हैं।
अब मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 12 सदस्य हो गए हैं — यानी पहली बार cabinet पूरी capacity पर है।
इतना लंबा इंतजार क्यों?
यह सवाल हर कोई पूछ रहा था। जवाब थोड़ा complicated है।
उत्तराखंड में कैबिनेट में कुल 12 पद होते हैं। 2022 में जब धामी सरकार बनी, तब से ही मंत्रिमंडल कभी पूरा नहीं भरा था। फिर 2023 में कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास का निधन हो गया — एक पद और खाली। उसके बाद 2025 में प्रेमचंद्र अग्रवाल को एक विवादित बयान की वजह से इस्तीफा देना पड़ा — पदों की संख्या बढ़कर पांच हो गई।
यानी लंबे समय से सरकार केवल 7 मंत्रियों के साथ चल रही थी। और अब नवरात्र पर वो सभी पांच खाली कुर्सियां भर दी गईं।
नवरात्र पर timing — coincidence या strategy?
अब यहां interesting politics है। नवरात्र के दूसरे दिन कैबिनेट विस्तार करना — यह coincidence नहीं लगता।
BJP के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक occasions पर बड़े political moves करना एक pattern रहा है। नवरात्र का महत्व उत्तराखंड जैसे राज्य में और भी ज्यादा है जहां devotion और politics एक-दूसरे से closely जुड़े हैं। इस timing से एक message भी गया — सरकार सकारात्मक कदम उठा
मदन कौशिक — क्यों इनका नाम सबसे ऊपर है?
मदन कौशिक वो नाम हैं जिन्हें उत्तराखंड BJP का backbone माना जाता है। हरिद्वार से विधायक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, और दशकों पुराना संगठन में अनुभव — इनकी मंत्रिमंडल में entry बहुत मायने रखती है।
भारत सिंह चौधरी का संस्कृत में शपथ — बड़ा cultural statement
यह moment viral होने वाला था। जब भारत सिंह चौधरी ने संस्कृत में मंत्री पद की शपथ ली, तो समारोह में एक अलग ही माहौल बन गया। उत्तराखंड देवभूमि कहलाता है — यहां संस्कृत में शपथ एक deeply symbolic gesture था।
यह सिर्फ भाषाई choice नहीं था — यह एक cultural और political positioning थी जो clearly दिखाती है कि 2027 के elections से पहले BJP किस narrative को push करना चाहती है।
चुनाव से पहले का masterstroke या मजबूरी
दोनों। थोड़ी मजबूरी भी थी क्योंकि इतने पद खाली रखना administratively और politically expensive था। लेकिन timing clearly strategic है।
2027 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP को अभी से ground set करनी है। कैबिनेट विस्तार के जरिए:
- क्षेत्रीय balance साधा गया — पहाड़ और मैदान दोनों को representation
- जातीय समीकरण — अलग-अलग communities को cabinet में जगह
- संगठन और सरकार दोनों एक साथ strong दिखें — यह message दिया गया
- विधायकों में असंतोष की जो संभावना थी, वह भी काफी हद तक address हुई
Political analysts मान रहे हैं कि यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक जरूरत नहीं — यह election से पहले का एक carefully planned political move है।
खजान दास — पहली शपथ, बड़ा signal
खजान दास का नाम सबसे पहले आना symbolic था। ये अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और उनकी inclusion से BJP ने एक clear message दिया — सरकार हर वर्ग की है।
उत्तराखंड में SC voters का एक significant हिस्सा है और elections से पहले यह representation बहुत matters करती है।
राम सिंह केड़ा — पहाड़ को मिली आवाज़
राम सिंह केड़ा की entry से पहाड़ी क्षेत्रों को एक मजबूत representative मिला। उत्तराखंड में पहाड़ बनाम मैदान का issue हमेशा politically sensitive रहा है। हर सरकार को यह balance करना होता है — और धामी सरकार ने इस विस्तार में वो balance रखने की कोशिश की है।
अब आगे क्या?
कैबिनेट तो भर गई — लेकिन असली test अब शुरू होगा। नए मंत्रियों को साबित करना होगा कि वे सिर्फ numbers नहीं हैं। Portfolios का distribution, नई policies, और जनता तक पहुंच — यह सब देखना बाकी है।
Congress ने इस विस्तार को “election से डरी हुई सरकार का desperate move” बताया है। उनका कहना है कि अगर इरादा नेक था तो इतने साल खाली पद क्यों रहे?
BJP की ओर से जवाब है — सही समय पर सही लोगों को जगह दी गई।
दोनों के argument में थोड़ी-थोड़ी सच्चाई है। लेकिन ultimately यह decide करेगी उत्तराखंड की जनता — 2027 में।
Bottom line?
धामी सरकार ने लंबे इंतजार के बाद जो कदम उठाया, वह politically smart है। नवरात्र की timing, क्षेत्रीय balance, और अनुभवी चेहरों की inclusion — सब मिलाकर यह एक well-calculated move लगता है।
लेकिन राजनीति में announcements से ज्यादा delivery मायने रखती है। अब देखना यह है कि यह नई cabinet सिर्फ headlines बनाती है — या सच में फर्क लाती है।
उत्तराखंड जाग रहा है। और 2027 दूर नहीं।













